Kund Kund Kahan Digamber Jain Mumukushu Ashram Trust
Village Seeta, Keshoraipatan Main Road, Post Teerath, Teh Talera, Distt Bundi Raj.
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श्री कुंदकुंद-कहान दिगंबर जैन मुमुक्षु आश्रम ट्रस्ट, कोटा की स्थापना ०४ फरवरी २००६ को आचार्य प्रवर श्री कुंदकुंद स्वामी और गुरुदेव श्री कानजी स्वामी की पावन प्रेरणा से हुई। इस ट्रस्ट का उद्देश्य केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिनवाणी के संरक्षण, अध्ययन और प्रचार-प्रसार को जन-जन तक पहुँचाना है।

आश्रम आठ बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है, जहाँ भव्य जिनालय, जिनप्रतिमाएँ, और शास्त्र-अध्ययन केंद्र विद्यमान हैं। यहाँ शास्त्र स्वाध्याय, पूजन, विधान, शिविर, प्रवचन तथा अध्यात्मिक प्रशिक्षण के आयोजन नियमित रूप से होते रहते हैं।

ट्रस्ट के अंतर्गत आचार्य धरसेन दिगंबर जैन सिद्धांत महाविद्यालय की स्थापना २००८ में की गई, जहाँ तत्त्वज्ञान और शास्त्र-अध्ययन की विधिवत शिक्षा दी जाती है। इसके अतिरिक्त, आचार्य समन्तभद्र विद्यानिकेतन २०१८ से संचालित है, जहाँ बालकों को बचपन से ही धर्म-संस्कारों की नींव दी जाती है।

ट्रस्ट की समस्त गतिविधियाँ केवल जैन समाज ही नहीं बल्कि सभी इच्छुक साधकों के लिए खुली हैं। यहाँ जाति, भाषा और प्रांत का कोई भेदभाव नहीं है। उद्देश्य यही है कि प्रत्येक जीव आत्मकल्याण की दिशा में प्रेरित हो और मोक्षमार्ग का सच्चा साधक बने।

श्री कुंदकुंद कहान दिगंबर जैन मुमुक्षु आश्रम ट्रस्ट कोटा

|| संक्षिप्त परिचय ||

अनंत तीर्थंकरों और आचार्यों की भावनाओं के अनुरूप कल्याणकारी जिनवाणी और जिनधर्म चिरकाल तक जयवन्त वर्ते – इसी मंगलमय भावना से अध्यात्मिक सत्पुरुष गुरुदेव श्री कानजी स्वामी के पुण्य प्रभावना योग में ०४ फरवरी से १० फरवरी २००६ तक अनेक विद्वानों के सानिध्य में श्री कुन्दकुन्द- कहान दिगम्बर जैन मुमुक्षु आश्रम की स्थापना हुई |

आश्रम की स्थापना के समय ही शास्त्र स्वाध्याय, पूजन, विधान, ग्रुप शिविर एवं शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर आदि का आयोजन धर्म-शिक्षा हेतु महाविद्यालय की स्थापना की तथा जिनवाणी का प्रकाशन आदि गतिविधियाँ निरंतर संचालित हो रही हैं |

आठ बीघा क्षेत्र में फैले मुमुक्षु आश्रम में भव्य श्री शीतलनाथ जिनालय, श्री महवीर स्वामी जिनालय, श्री सीमंधर जिनालय, उत्तुंग श्री मानस्तंभ जिनालय एवं कृत्रिम पहाड़ी पर ग्यारह फीट ऊँची कायोत्सर्ग मुद्रा वाली श्री मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा युक्त जिनालय हैं |